ईमानदार टैक्सपेयर्स को कोई फायदा नहीं, GST रिटर्न के लेट फीस में मामूली छूट
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल की हाल ही में हुई मीटिंग में कोरोना की दूसरी लहर के कारण हुए नुकसान को देखते हुए राहत के उपायों पर चर्चा की गई थी। GST काउंसिल की यह 43वीं मीटिंग थी जो पिछली मीटिंग के 7 महीने से अधिक बीत जाने के बाद हुई। इसमें एक महत्वपूर्ण फैसला उन टैक्सपेयर्स को राहत देने का लिया गया जिन्होंने रिटर्न नहीं भरी है
इनमें वे टैक्सपेयर्स शामिल हैं जिन्होंने जुलाई 2017 से इस वर्ष अप्रैल तक GSTR 3B रिटर्न भरने में डिफॉल्ट किया है। जिन टैक्सपेयर्स की कोई टैक्स देनदारी नहीं है उनके लिए CGST और SGST प्रत्येक के लिए लेट फीस 250 रुपये तक सीमित की गई है। जिन टैक्सपेयर्स की टैक्स देनदारी है उनके लिए लेट फीस CGST और SGST प्रत्येक के लिए 500 रुपये होगी।
इसके तहत उन्हीं टैक्सपेयर्स को राहत दी जाएगी जो 1 जून से 31 अगस्त के बीच रिटर्न दाखिल करेंगे।
यह छूट GSTR 1 के लिए लागू नहीं है। इसके अलावा इसे भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जिन टैक्सपेयर्स का रजिस्ट्रेशन GST रिटर्न निर्धारित तिथि के अंदर नहीं भरने के कारण डिपार्टमेंट की ओर से कैंसल किया गया है उनके लिए क्या प्रक्रिया होगी। य
ह भी नहीं बताया गया है कि टैक्सपेयर अगर अब रिटर्न भरते हैं तो उन्हें इस अवधि के लिए GSTR 3B में इनपुट क्रेडिट मिल सकेगा या नहीं।
ऐसा लग रहा है कि यह केवल GSTR 3B के लिए लेट फीस में छूट के जैसा है।
GST Council की ओर से उन टैक्सपेयर्स के लिए कोई इंसेंटिव नहीं दिया गया है जिन्होंने कानून का पालन किया है और पहले ही लेट फीस का भुगतान कर दिया है।
फाइनेंस मिनिस्ट्री ने हाल ही में एक RTI के जवाब में बताया था कि उसने टैक्सपेयर्स से पेनल्टी के तौर पर 1,600 करोड़ रुपये से अधिक एकत्र किए हैं। लेट फीस में छूट उन लोगों को दी जा रही है जिन्होंने रिटर्न भरने में देरी की है, लेकिन उन टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त लेट फीस नहीं लौटाई जा रही जिन्होंने छूट की घोषणा स पहले अपनी रिटर्न दाखिल की थी। यह सभी टैक्सपेयर्स के साथ एक समान व्यवहार नहीं कहा जा सकता।
CGST के सेक्शन 47 के तहत लेट फीस की एक सीमा तय की गई है
1- जिन टैक्सपेयर्स पर GSTR 3B के तहत कोई टैक्स लायबिलिटी नहीं है और GST1 में उनकी बिक्री ना हुई है। इसके लिए लेट फीस हर रिटर्न पर 500 रुपए (250-250 रुपए CGST और SGST के लिए ) तय किया गया है।
2. एक साल पहले सालाना कुल टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए रहने पर हर रिटर्न पर लेट फीस 2000 रुपए लगेगा। इसमें 1000 रुपए CGST और 1000 रुपए SGST के लिए होगा।
3. एक साल पहले सालाना कुल टर्नओवर 1.5 करोड़ से 5 करोड़ रुपए के बीच है तो हर रिटर्न पर लेट फीस 5000 रुपए लगेगा। इसमें 2500 रुपए CGST और 2500 रुपए SGST के लिए होगा।
4. एक साल पहले सालाना कुल टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से ज्यादा है तो हर रिटर्न पर लेट फीस 10000 रुपए लगेगा। इसमें 5000 रुपए CGST और 5000 रुपए SGST के लिए होगा।
नियमों में बदलाव होने से पहले तक GST के कानूनों के मुताबिक, लेट फीस की कोई अधिकतम सीमा नहीं थी। यहां तक कि पुराने नियमों के मुताबिक, लेट फीस मैक्सिमम नेट टैक्स पर लगाया जाता था।
इसके साथ ही GST रिटर्न के डेटा से पता चलता है कि 80-90 फीसदी टैक्सपेयर्स डेडलाइन खत्म होने के बाद रिटर्न फाइल किया या फिर नहीं किया। यानी समस्या कुछ और है। टैक्स सिस्टम को कामयाब बनाने के लिए जरूरी है कि टैक्सपेयर्स आसानी से उसका इस्तेमाल कर सकें।
सरकार ने जब GST कानून को लागू किया था तब कई मामलों में आसान इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा नहीं थी। जबकि यह सुविधा इससे पहले के टैक्स सिस्टम में थी। यहां तक कि GST के नए नियमों को लागू करने के बाद फॉर्म 2A, 2B और रूल 36(4) जैसे नए नियम लागू किए गए ताकि इनपुट टैक्स के मौके कम किए जाएं।
इससे कई टैक्सपेयर्स को रिफंड मिलने में दिक्कत हुई और वर्किंग कैपिटल साइकिल प्रभावित हुआ। इसकी वजह से भी रिटर्न फाइल करने में देर लगती है। टैक्सपेयर्स से 18 से 24 फीसदी तक इंटरेस्ट वसूला जाता है जबकि रिफंड पर सरकार सिर्फ 6 फीसदी टैक्स देती है।
यहां तक कि GST लागू होने के 4 साल बाद भी इसे आसान बनाने के लिए काफी कुछ करने की जरूरत है ताकि आसान क्रेडिट, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को बढ़ा मिले। अगर सरकार ऐसा करने में कामयाब हो पाती है तो टैक्स कलेक्शन अपने आप बढ़ेगा।
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